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शुध्द पानी 💧 के लिये For Good drinking water

 *💐 शुध्द पानी 💧 के लिये 🌧️* *💐 क्या बेहतर है R.O या मटका💐* लैपिडरी ट्रस्ट और ज्ञान प्रकाश मिश्र बाबुल प्रस्तुत करते हैं *स्वच्छ पानी पीने के उपाय और स्वच्छ पानी पीने के घरेलू नुस्खे*  जैसा की आप सबको पता है कि आजकल आर ओ  का पानी पीने का प्रचलन बढ़ गया है लेकिन क्या आपको यह भी पता है कि आर ओ का पानी कब पीना चाहिए और आर ओ कितने प्रकार के होते हैं 😳⁉️   शायद नहीं 🤔  हमारे पीने के पानी में कुछ ठोस अपशिष्ट पदार्थ मिले हुए होते हैं इनको हम शॉर्ट फॉर्म में टीडीएस कहते हैं  जब पानी में टीडीएस की मात्रा 900 से अधिक होती है तब उसे शुद्ध करने के लिए हमें आर ओ  की जरूरत होती है  लेकिन जब यही टीडीएस की मात्रा 900 से कम होती है और 500 से अधिक होती है तब उसे शुद्ध करने के लिए प्यूरीफायर की एक और तकनीक होती है जिसको हम UV  कहते हैं इस मशीन का प्रयोग करते हैं  और अगर हमारे पानी का टीडीएस 500 से कम है तब ऐसी स्थिति में हम एनएफ या  यूएफ प्यूरीफायर का प्रयोग कर सकते हैं 🤦‍♂️🤔😳🥺🕵️‍♂️ भ्रमित हो रहे हैं न   इन सब की जरूरत ही नह...

सर्व देव आरती AARTEE

 आरती, धूप कपूर पुष्प  से  सब नर नारी सजाए हैं  पूजा करो स्वीकार हमारी  श्रद्धा से शीश झुकाए हैं  प्रथम आरती मातु तुम्हारी  शक्ति की अवतारी हो  तुम ही दुर्गा ,सीता रुकमणी  काली खप्पर वाली हो  संतोषी संतोष का धन दो  शारदा मैहर शक्ति दो  देवी सरस्वती ज्ञान हमें दो  उमा रमा तुम भक्ति दो  सती सावित्री शाकंभरी तुम  नैना ज्वाला कामाख्या  गायत्री के रूप में मैया  कैसे करें महिमा व्याख्या  अपना बालक जान के मैया  सब करती दूर बलाये हैं आरती,धूप  कपूर पुष्प से  सब नर नारी सजाए हैं  पूजा करो स्वीकार हमारी  श्रद्धा से शीश झुकाए हैं  ग्यारह रुद्र अवतार प्रभु का   अश्विन और कुमारे है मत्स्य ,कूर्म ,बाराह, नरसिंही  वामन हरी सुकुमारे है  विश्व रचयिता ब्रह्मदेव  विष्णुपद प्रिय हमारा है  किसे छुए यम शनि अग्नि  जब हनुमत नाम तुम्हारा है  तुम महेश शिव भोले शंभू  पार्वती के प्यारे हो  संग गणेश कार्तिकी नंदी  देवों का कष्ट उबारे हो हे सूर्य चं...

A TRUTH OF VALENTINE DAY 14 FEBRUARY, fourteen Fact about 14 FEBRUARY ,14 फरवरी के चौदह सत्य

 *💐💓 14 फरवरी💓💐* *A TRUTH OF VALENTINE DAY 14 FEBRUARY* *💐रोचक तथ्य और विश्लेषण 💐* *✍️ लेखक - ज्ञान प्रकाश मिश्र 'बाबुल'* *14 फरवरी के 14 सत्य*  14 फ़रवरी अनेक देशों में अनेकों लोगों द्वारा दुनिया भर में मनाया जाता है। विशेषकर अंग्रेजी बोलने वाले देशों में, यह एक पारंपरिक दिन है, जिसमें प्रेमी युगल एक दूसरे से अपने प्रेम का इजहार वैलेंटाइन कार्ड या फूल देकर करते हैं, क्या हमने कभी यह सोचने या समझने का प्रयास किया कि पूरा देश जिस अंध गति से  इस प्रेम परंपरा के पीछे दौड़ चला है उसके पीछे की असली कहानी क्या है ? .........??   नहीं ना तो आइए आज थोड़ा सा समय निकाले और यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर में 14 फरवरी के पीछे का वह सत्य क्या है जिसके पीछे आज पूरी दुनिया पागल सी हुई प्रेम पुजारी बनकर घूम रही है *फैक्ट नम्बर 1*  *पहला सत्य* वास्तव में यह एक ईसाई संतों का शहीदी दिवस है, जिन्होंने 200 ईसवी के आसपास ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार करने और इसाई धर्म को मान्यता देने में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, रोम के संत वैलेंटाइन रोम के एक पादरी थे जिनको लगभग 26...

मलमास -- एक वैदिक परिष्करण का मास A Leap year concept in ancient indian HINDU Calander system known as PURUSHOTTAM MAAS , MAL MAAS , ADHIK MAAS

 *मलमास -- एक वैदिक परिष्करण का मास* ===================== *सौर-वर्ष का मान ३६५ दिन, १५ घड़ी, २२ पल और ५७ विपल हैं। जबकि चांद्रवर्ष ३५४ दिन, २२ घड़ी, १ पल और २३ विपल का होता है। इस प्रकार दोनों वर्षमानों में प्रतिवर्ष १० दिन, ५३ घटी, २१ पल (अर्थात लगभग ११ दिन) का अन्तर पड़ता है। इस अन्तर में समानता लाने के लिए चांद्रवर्ष १२ मासों के स्थान पर १३ मास का हो जाता है।* *वास्तव में यह स्थिति स्वयं ही उत्त्पन्न हो जाती है, क्योंकि जिस चंद्रमास में सूर्य-संक्रांति नहीं पड़ती, उसी को "अधिक मास" की संज्ञा दे दी जाती है तथा जिस चंद्रमास में दो सूर्य संक्रांति का समावेश हो जाय, वह "क्षयमास" कहलाता है। क्षयमास केवल कार्तिक, मार्ग व पौस मासों में होता है। जिस वर्ष क्षय-मास पड़ता है, उसी वर्ष अधि-मास भी अवश्य पड़ता है परन्तु यह स्थिति १९ वर्षों या १४१ वर्षों के पश्चात् आती है। जैसे विक्रमी संवत २०२० एवं २०३९ में क्षयमासों का आगमन हुआ तथा भविष्य में संवत २०५८, २१५० में पड़ने की संभावना है* *मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मलमास पड़ गया है।* *अंग्रेजी कैलेंडर में हर 4 साल बाद एक...

Not only in the Corona era, private school teachers always in trouble all the time

कोरोना काल मे ही नही हर समय रहता है प्राइवेट स्कूल शिक्षकों का दुर्दिन 🙏 जय हिंद, किसी भी देश की दशा और दिशा सुधारने के लिए शिक्षकों का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है , इनकी उंगली पकड़ कर ही विकास का रथ खींचने वाला महारथी पलता और बढ़ता है -- किन्तु इन *शिक्षकों की दशा की जो अनदेखी वर्तमान दौर में हो रही है उन सब का जिम्मेदार कौन है ????* पूरा विश्व *कोरोना महामारी* के संकट से गुजर रहा है , इस भयावह स्थिति में जब सरकारें ,संस्थाएं , उच्च आय वर्ग के लोग निर्धन ,गरीब , श्रमिक वर्ग, और दैनिक कार्य कर जीवन यापन करने वाले लोंगों की मदद को आगे आये *इसी परिस्थिति में प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाला अध्यापक भी आशा भरी निगाहों से देख रहा था*  हाल ही में *लैपिड्री ट्रस्ट* संस्था की तरफ से कराए गए  एक सर्वेक्षण *गुरु दक्षिणा* के परिणामों से यह बात स्पष्ट हो गई की *प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की दशा न सिर्फ कोरोना काल मे बल्कि पूरे समय लगभग एक जैसी ही रहती है*  जून 2020 में 15 दिन तक चले एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में सैकड़ों लोंगों ने प्रतिभाग किया जिसके परिणाम स्वरूप यह तथ्य सामने आया कि ...

Corona effects on environment पर्यावरण पर कोरोना और लॉक डाउन का प्रभाव

*विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस 🌏 आज कोरोना वायरस को धन्यवाद देने का दिन है इस पर्यावरण दिवस पर प्रकृति ने प्रकृति को अमूल्य तोहफा दिया है* 🙏 *यह लेख स्वतंत्र स्तम्भकार ज्ञान प्रकाश मिश्र जी के शोध अध्ययन पर आधारित है , विश्व मे प्रकाशित विभिन्न शोध पत्रों के निष्कर्ष पर यह तथ्य प्रस्तुत किये गए हैं* ✍️ 🔇🔕🔁♻️🚯📵🚭♨️🆑✈️🚉🚚🌋 पर्यावरण दिवस 1974 में पहली बार आयोजित किया गया था और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जागरूकता और कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 5 जून को मनाया जाता है। यह पर्यावरण से संबंधित मुद्दों जैसे वायु प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जनसंख्‍या बढ़ोतरी आदि के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था  ✍️ इस बार का पर्यावरण दिवस बीते कई वर्षों की तुलना में कुछ बेहद खास है ,नवीन है  ✍️ इस बार तो पर्यावरण एकदम साफ-सुथरा, स्वच्छ और परिष्कृत रूप में है। ✍️ कोरोना वायरस से मानवता को जरूर बड़ा नुकसान हुआ है लेकिन पर्यावरण पर इसका सकारात्‍मक प्रभाव पड़ा है 👉👉 *जब मानव लॉक 🚷हुआ तब .....................* *वाहन बन्द,कारखाने बन्द,प्रदूषण बन्द,धु...

कर्क रोग का कारण और बचाव Reason and prevention of cancer

साथियों ,परिस्थिति के अनुसार एक प्रश्न के परिपेक्ष्य में *कैंसर* कर्क रोग पर आधारित यह लेख आप सब तक प्रेषित है , हर सम्भव प्रयास किया गया है कि इसे संक्षेप में और साधारण भाषा में प्रस्तुत किया जाय जिससे सभी जन मानस को समझने में आसानी हो -- आपका ज्ञान प्रकाश मिश्र 'बाबुल' सबसे पहले जान लें कि *कर्क रोग cancer* है क्या ????? मैं तो इसे *कचरे का रोग* कहता हूँ ,शरीर के अंदर अनावश्यक कचरे के जमाव से उतपन्न रोग ही कैसर या कर्क रोग है । यह रोगों का एक वर्ग है जो तीन श्रेणियों में विभक्त हैं पहला जिसमें कोशिकाओं के एक समूह में अनियंत्रित वृद्धि हो जाती है दूसरा यह आस-पास के उतकों का विनाश और उन पर आक्रमण शुरू कर देता है तीसरा लसिका या रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में भी फ़ैल जाता है । कर्क के ये तीन लक्षण इसे सौम्य गाँठ अथवा ट्यूमर या अबुर्द के नाम से विभेदित करते हैं, जो स्वयं सीमित हैं किन्तु आक्रामक नहीं हैं अधिकांश कैंसर एक गाँठ या ट्यूमर बनाते हैं, लेकिन कुछ रक्त के कचरे गाँठ नहीं बनाते है साथ ही प्रत्येक गांठ जो शरीर के अंतः या बाह्य भाग में होती है आवश्यक नह...