ईरान अमेरिका इजराइल युद्ध में पाकिस्तान का रोल क्यों ? Why is Pakistan playing an important role in the Iran-US-Israel conflict?
पाकिस्तान का रुतबा या डर
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इजरायल ईरान और अमेरिका के युद्ध को लेकर के एक बड़ी खबर आई कि पाकिस्तान ने मध्यस्थता करके युद्ध को रुकवा दिया है ।
इसमें भारत की किरकिरी हो रही है ,प्रधानमंत्री मोदी की किरकिरी हो रही है, भारत में विपक्षी राजनीतिक पार्टियां वर्तमान भारत सरकार को आड़े हाथों लेकर के उन्हें कोस रही है ! की जो पाकिस्तान आतंकवाद को पनाह देता है , जो पाकिस्तान पानी और आटे के लिए गृहयुद्ध लड़ रहा है , जो पाकिस्तान दिवालिया होने को है , वह आज ग्लोबल लीडर बन गया ! उसने अमेरिका और ईरान का युद्ध रुकवा दिया !!
इन घटनाक्रम के पीछे का , मै अपना तथ्य रखना चाहता हूं ✍️✍️
जो आज तक किसी मीडिया ने
प्रिंट मीडिया , सोशल मीडिया , डिजिटल मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने अपने विश्लेषण में शामिल नहीं किया ।
मुझे जहां तक लगता है कि पाकिस्तान इस युद्ध को रुकवाने में इसलिए ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है, क्योंकि जितने भी मुस्लिम देश हैं उन सभी मुस्लिम देशों में केवल पाकिस्तान एक ऐसा राष्ट्र है जिसके पास परमाणु हथियार है , ईरान भी परमाणु हथियार बनाने के रास्ते पर काफी आगे बढ़ चुका था , जिसको लेकर के अमेरिका ने और इजरायल ने अपने देश के प्रति खतरा पैदा करने वाली स्थिति को भाप करके उस पर हमला कर दिया ।
पाकिस्तान को कहीं ना कहीं अंदर खाने यह डर सता रहा है कि अगर उसने इस युद्ध को नहीं रुकवाया तो ईरान से जो परमाणु कार्यक्रम खत्म हो रहा है , इसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ सकता है, भविष्य में पाकिस्तान पर भी ऐसे हमले हो सकते हैं ! उसके भी परमाणु हथियार और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया जा सकता है ? क्योंकि सिर्फ वही एक मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु हथियार की ताकत है , दूसरी बात पाकिस्तान के ऊपर आज तक अमेरिका ने परमाणु हथियार को लेकर के दबाव इसलिए नहीं बनाया क्योंकि वह अमेरिका से भौगोलिक दृष्टि से काफी दूर है और भारत के नजदीक , अभी तक भारत में जितने भी सरकार रही वह सभी सरकार अमेरिका जैसे ताकतवर देश के सामने झुक कर रहने का वादा किया, जब भारत में 1998 में तत्कालीन भारत सरकार ने परमाणु कार्यक्रम की घोषणा की तो विश्व के कुछ देशों ने अंदर अंदर पाकिस्तान को सहायता दी और उसे भी परमाणु हथियार बनाने के लिए न सिर्फ उकसाया बल्कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी ने जब 11 मई 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया उसके बाद विश्व के अनेक देशों ने हम पर प्रतिबंध लगा दिए और ठीक उसके बाद 28 मई 1998 को ही पाकिस्तान को भी अमेरिका आदि जैसे विभिन्न देशों ने अंदर खाने मदद दे करके उसे भी परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बना दिया ( वो भी सिर्फ भारत के विरोध में ) ।
विश्व के बड़े बड़े धनाढ्य देशों के लिए भारत इस समय सबसे बड़ा आर्थिक खतरा है , पाकिस्तान इन देशों के सामने मक्खी की तरह है इसलिए लगभग सभी ग्लोबल देश ( चीन जैसे बड़े देश ) भारत को पीछे करने के लिए पाकिस्तान को अधिक महत्व दे रहे हैं ।
जबकि सब को पता है कि पाकिस्तान आतंकवाद की मांद है , और ये बात 26/11 के बाद अमेरिका को भी समझ में आ गई थी , फिर उसने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान से ही खोद कर निकाला था ।
कहीं ना कहीं विदेशी ताकतों का सपोर्ट पाकिस्तान के साथ में है !
और वह चाहते हैं कि पाकिस्तान का आतंकवाद पलता पोसता रहे, क्योंकि पाकिस्तान से ही भारत के ऊपर ऐसे ही दबाव बनाए जा सकते है जिससे भारत आतंकवाद में उलझा रहे ??
लेकिन भारत की बढ़ती लोकप्रियता, ट्रिलियन इकोनामी, विश्व के अनेक राष्ट्रों में इसका वर्चस्व कहीं ना कहीं यह सारी चीज कुछ विदेशी राष्ट्रों को राश नहीं आ रही है !! इसलिए वह पाकिस्तान को अंदर खाने मदद दे करके विश्व के पटल पर सामने लाना चाह रहे हैं साथ ही पाकिस्तान अपना परमाणु हथियार बचाने के लिए , अपने देश को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए , विश्व पटल पर आने के लिए, ईरान से दोस्ती बनाए रखने के लिए, मुस्लिम देशों में लीडर बनने के लिए ....... इस खेल की कठपुतली बन गया है।
कहीं ना कहीं यह कुछ ऐसे कारण है जिसकी वजह से आज पाकिस्तान को लोग अमेरिका इजरायल और ईरान के युद्ध को रोकने के लिए हीरो बना दिए और सर आंखों पर बिठा लिए हैं । लेकिन इसके पीछे कही न कहीं अमेरिका की चाल है , भारत को मात देकर पाकिस्तान को लाइम लाइट में लाने की ! या हो सकता है अगला निशाना पाकिस्तान हो !
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ज्ञान प्रकाश मिश्र "बाबुल"
ज्ञानभद्राचार्य स्वतंत्र स्तंभकार
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