पहली बार, उसके आने पर बिटिया को कैसे समझाएं ? How to explain menstruation to your daughter when she gets her first period ?
एक दिन लाडो स्कूल से आई और चुपचाप डरी सहमी सी अपनी मां से लिपट कर रोने लगी !!!!!
श्रीमती जी ने बड़े प्यार से पुचकारते हुए पूछा , क्या हुआ बिटिया ? किसी ने कुछ कहा है क्या ? किसी ने मारा है क्या ? मैडम ने कुछ कहा ? प्रिंसिपल ने कुछ बोला ? तुम्हारा कोई सामान चोरी हो गया है ??? किसी से झगड़ा करके आई हो ?? कुछ दर्द कर रहा है ??? एक सांस में न जाने कितने सवाल पूछ डालें, आखिर ठहरा तो मां का दिल, और बिटिया सिर्फ सिसकियां लिए जा रही थी, कुछ बोली ही नहीं !
काफी देर बाद जब मैने श्रीमती जी से पूछा कि आखिर हुआ क्या था ? बिटिया रो क्यों रही थी? तो उन्होंने बताया की उसे लड़कियों वाली समस्या शुरू हो गई है, और उसकी अंडरवियर में ब्लड स्पॉट ( खून के धब्बे ) लगे थे ! वो डर गई थी कि क्या हो गया !!
.............. तब मुझे लगा कि, इस तरीके से काम चलने वाला नहीं है, हमें इस शारीरिक परिवर्तन के बारे में अब उसे स्पष्ट रूप से सब कुछ बताना होगा, और इसकी पूरी जानकारी उसे देनी होगी ।
ताकि कोई और बेटी इन धब्बों को देखकर डरे नहीं ✍️✍️✍️
कोई और माँ इस सच को अपनी बेटी को बताने में झिझके नहीं 👍💝
कोई और लड़की अपने शरीर के इस हार्मोनल चेंज से अनजान न रहे 👍💝
✍️💝 शारीरिक संरचना 💝✍️
लड़के और लड़कियों की पूरी शारीरिक संरचना लगभग एक जैसी होती है, सिर्फ उनके जननांग अलग होते हैं, क्योंकि प्रकृति उन्हें ( लड़कियों को ) माँ बनने का सौभाग्य प्रदान करती है ।
लड़कियों के शरीर के अंदर बच्चेदानी होती है जिसमें वैवाहिक अंतर्संबंध के बाद भ्रूण का विकास होता है , इसे गर्भाशय भी कहते है ।
साथ ही एक निश्चित आयु के बाद उनके सीने पर स्तन का विकास हो जाता है, जो गर्भाशय से जन्म लेने वाले नवजात शिशु को दुग्धपान कराने में सहायक होता है ।
How to explain menstruation ? ✍️✍️✍️
when she gets her first period ? ✍️✍️✍️
भौगोलिक दृष्टि से भारत देश एक विश्वतरेखीय, शीतोष्ण कटिबंधीय राज्य की श्रेणी में आता है अर्थात भारत देश में जाड़ा ,गर्मी ,बरसात सब मौसम सामान्य रूप से आता जाता है । इसलिए यहां पर लड़कियों में सामान्यतया 12 वर्ष की आयु से लेकर 14 वर्ष की आयु तक के बीच में ही माहवारी ( Periods / Menstruation ) शुरू हो जाती है ।
माहवारी ( Periods / Menstruation ) लड़की के जीवन का बहुत संवेदनशील और अहम समय होता है।
इस समय उसे इस विषय के बारे में समझ होने की जरूरत होती है।
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1. सबसे पहले जब बिटिया को खून के धब्बे या ड्रॉप्स दिखे तो माहौल को आरामदायक बनाएं ✍️
उससे अकेले में, प्यार से और बिना शर्म/डर के बात करें। उसे बताए , विश्वास दिलाऐं कि यह बिल्कुल सामान्य बात है। उसे यह भी बताए कि यह सिर्फ रक्त या खून का बहाव नहीं है यह शरीर के अंदर का एक हार्मोनल प्रोसेस है जो शरीर को अंदर से तैयार करता है भविष्य में गर्भ धारण के लिए ।
2. बिटिया को सरल भाषा में समझाएं कि ✍️
“यह हर लड़की के साथ होता है। माहवारी ( Periods / Menstruation ) आने का मतलब है कि तुम्हारा शरीर बड़ा हो रहा है और अंदर सब कुछ ठीक है।”
3. उसके मन के डर और भ्रम को दूर करें उसे बताएं कि ✍️
"यह कोई बीमारी नहीं है , खून जैसे लाल रंग के पानी का बहाव आना सामान्य बात है, यह 3 से 7 दिन या शुरू में 10 दिन तक भी आ सकता है, और यह अब हर महीने 20 से 28 दिन या 20 से 35 दिन के बाद होता रहेगा , जब तक तुम्हारी उम्र लगभग 50 साल की नहीं हो जाती है , या जब तुम भविष्य में गर्भ धारण करोगे ( जब माँ बनने वाली स्थिति में होगी ) तब यह माहवारी ( Periods / Menstruation ) अगले 10 महीने तक नहीं होगी ।
मतलब यह माहवारी ( Periods / Menstruation ) अब जीवन में दो स्थिति में ही बंद होगी , पहली जब तुम आगे चलकर माँ बनोगी तब और दूसरी जब तुम लगभग 50 वर्ष की होने को हो जाओगी तब यह माहवारी ( Periods / Menstruation ) अपने आप प्राकृतिक रूप से बंद हो जाएगी ।
4. उसे साफ-सफाई रखने के बारे में बताएं ✍️
सेनेटरी पैड कैसे इस्तेमाल करना है ? ( पैड का मतलब एक प्रकार का रेडीमेड सोख़्ता है जो माहवारी के बहाव ( खून,लिक्विड ) को सोख लेता है , जिससे लड़कियां माहवारी menstruation के दौरान भी अपना सामान्य काम काज कर सकती है , इस सोख़्ता को अंडरवियर के अंदर निचले हिस्से में लगाया जाता है )
सेनेटरी पैड उपलब्ध न होने पर साफ कॉटन के कपड़े का सोख़्ता बनाकर प्रयोग किया जाता है ।
पैड कब बदलना है ? 4 या 6 घंटे में , बहाव अधिक हो तो जल्दी पैड बदले , बहाव कम हो तो जरूरत महसूस होने पर बदला जाता है।
इस दौरान प्राइवेट पार्ट ( योनि ) के आसपास साफ / सफाई और सूखा रखना चाहिए ।
इस्तेमाल किया हुआ पैड सही तरीके से अखबार या कागज में लपेट करके फेंकना चाहिए या मिट्टी के नीचे दबा देना चाहिए। मिट्टी में कुछ दिन बाद वह सड़ जायेगा और बाहर जीवाणु कीटाणु नहीं पैदा होंगे ।
5. शरीर , कमर , पेडू , पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द और बदलाव के बारे में बताएं ✍️
उसे बताए कि हल्का पेट दर्द या कमजोरी हो सकती है, यह सामान्य बात है ।
जरूरत पड़े तो आराम करने को कहे या हल्का गरम पानी से सेंक करें , अधिक दर्द की दशा में सामान्य तौर पर MEFTAL SPAS और गैस की दवा अपने पास रखे , जरूरत महसूस होने पर प्रयोग करें ये दवाएं कोई साइड इफेक्ट नहीं करेंगी ।
6. बिटिया को भावनात्मक सपोर्ट दें ✍️
लड़की में इस दौरान मूड स्विंग्स आ सकते हैं, अर्थात मन में चिड़चिड़ापन हो जाता है, उसे कुछ भाता नहीं , इसलिए उससे कहें कि जो भी महसूस हो खुलकर बताए क्योंकि ये ऐसे बदलाव है कि कुछ भी अनुमान लगाना कठिन हो जाता है ।
7. कुछ सामाजिक रिवाजों और धारणाओ के बारे में भी उसे साफ साफ बताएं ✍️
कि माहवारी ( Periods / Menstruation ) के दौरान में मंदिर जाना, पूजा करना , भोग के लिए भोजन बनाना , बाल धोना सनातन परंपरा के अनुसार वर्जित है किंतु स्वयं का सामान्य काम करना गलत नहीं है । यह सिर्फ शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है ।
8. उसे भरोसा दिलाएं कि ✍️
“अगर कभी भी कोई सवाल या परेशानी हो तो तुम मुझसे ( माँ या पिता से ) बिना झिझक बात कर सकती हो।”
9. सावधानियां और विशेष देखभाल ✍️
इस दौरान बिटिया के खानपान , पोषक आहार पर विशेष ध्यान दें, उसे अधिक मात्रा में लिक्विड चीजे जैसे पानी ,जूस पीते रहने को कहे । पीरियड में खून की कमी और कमजोरी न हो, इसलिए खाने में आयरन के लिए हरी सब्जी (पालक), चुकंदर, गुड़, अनार, प्रोटीन के लिए दाल, दूध, अंडा , फल में केला, सेब, संतरा दें । दिन में 7–8 गिलास पानी पीने को बोले ।
चाय/कॉफी , बहुत तला-भुना या जंक फूड इस दौरान बंद कर दे या एकदम कम कर दें
अनार का जूस 👍 (खून की कमी दूर करने में मदद करता है )
नारियल पानी 👍 (डिहाइड्रेशन दूर करता है )
गुनगुना पानी या अदरक वाली चाय 👍 (दर्द में राहत देगा )
एकबार माहवारी ( Periods / Menstruation ) शुरू होने के साथ नियमित साप्ताहिक तौर पर बिटिया को आयरन ,कैल्शियम ,D3 , की खुराक भी दिलाते रहें ।
साथ ही जब माहवारी ( Periods / Menstruation ) शुरू हो जाती है तो उसके कुछ दिन या माह बाद लड़कियों के चेहरे पर पिंपल्स निकलने लगते है , उनके ब्रेस्ट ( स्तन ) छाती का आकार बढ़ने लगता है , स्तन जब बढ़ने लगता है तो खिंचाव के कारण उसमें हल्का दर्द महसूस हो सकता है , ये सारी सामान्य बाते उन्हें बताना जरूरी है ।
बहुत कसे कपड़े न पहनने दे , ब्रा या लेडिस बनियान बहुत कसी न पहनाए, इलास्टिक लगे कपड़े न पहने , इस दौरान 12 वर्ष से 16 वर्ष में बीच स्तन का विकास भी होता है इसलिए सलाह ये दी जाती है कि इस समय टाइट ब्रा का प्रयोग लड़कियों को न करने दे , शरीर को फ्री रहने दे उनमें नेचुरल ग्रोथ होना बहुत जरूरी है।
10. तैयारी रखे ✍️
एक बार जब बिटिया की माहवारी ( Periods / Menstruation ) का क्रम शुरू हो जाय तो नियमित रूप से उसे दिनों की गितनी रखना सिखाए और जब अगली माहवारी ( Periods / Menstruation ) की तारीख नजदीक आए तो उसके स्कूल बैग में सेनेटरी पैड / या कॉटन सोख़्ता कपड़ा इसके साथ एक अतिरिक्त अंडरवियर , अगर पहले तेज दर्द की शिकायत हुई हो तो meftal spas की गोली ये सभी आवश्यक चीजें किट के रूप में अवश्य रखे । और इन सब के सही इस्तेमाल की पूरी जानकारी दें ।
11. डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है .....✍️
जब बहाव बहुत ज्यादा हो (हर 1–2 घंटे में पैड बदलना पड़े )
बहुत तेज असहनीय दर्द हो
एक बार माहवारी ( Periods / Menstruation ) आने के 2–3 महीने तक माहवारी ( Periods / Menstruation ) न आए
माहवारी ( Periods / Menstruation ) में बदबू या डिस्चार्ज अजीब सा लगे , थक्का ज्यादा निकले ।
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आइए अब इस माहवारी ( Periods / Menstruation ) प्रोसेस को थोड़ा बायोलॉजिकल तरीके से समझते है । स्त्री के शरीर में एक आंतरिक अंग होता है जिसे यूटरस / गर्भाशय या बच्चेदानी कहते है , इसी बच्चे दानी में एक विशेष झिल्ली हार्मोनल प्रोसेस से बनती बिगड़ती रहती है, इस झिल्ली को एंडोमेट्रियम (Endometrium) कहते हैं , इसी झिल्ली के पिघल कर बिगड़ने और योनि के रास्ते से बाहर निकलने की प्रक्रिया को ही माहवारी ( Periods / Menstruation ) कहते है ।
बच्चेदानी में बनने वाली यह झिल्ली हमेशा बनती बिगड़ती रहती है जैसे मकड़ी का जाला बनता बिगड़ता रहता है , जब पहली बार बच्चेदानी में यह झिल्ली नुमा सुरक्षा कवच बनता है तो वह भ्रूण बीज का इंतजार करता है किंतु जब एक निर्धारित समय के अंदर उस झिल्ली में कोई भ्रूण बीज नहीं आता तो वह झिल्ली पिघल जाती है ,बिगड़ जाती है , टूट फूट कर पानी और खून जैसी बनकर योनि के रास्ते बाहर निकल जाती है यही प्रक्रिया माहवारी ( Periods / Menstruation ) कहलाती है , एक बार पूरी झिल्ली पिघल कर बह जाने के बाद फिर से नई झिल्ली बननी शुरू होती है और नई झिल्ली बनने की यह प्रक्रिया अगले 10 से 15 दिन या 20 दिन या 25 दिन या 30 दिन तक चलती है ( यह समय स्त्री के स्वास्थ्य ,मौसम , हार्मोनल बैलेंस और शारीरिक संरचना पर निर्भर करता है ) इस बीच में अगर कोई भ्रूण बीज झिल्ली के अंदर आ जाता है तो वह झिल्ली से चिपक जाता है, फिर यह झिल्ली टूटती ,पिघलती या बिगड़ती नहीं और माहवारी ( Periods / Menstruation ) नहीं होती । स्त्री के शरीर के हार्मोन के आधार पर एक निश्चित आयु के बाद यह झिल्ली ( एंडोमेट्रियम (Endometrium) बननी पूरी तरह से बंद हो जाती है इसी दशा में जब झिल्ली बनती ही नहीं तो पिघलेगी क्या ? तो माहवारी ( Periods / Menstruation ) पूरी तरह बंद हो जाता है इस प्रक्रिया को "मीनोपॉज" कहते है ।
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