Posts

गजल - सम्बन्ध

 सम्बन्धों की तुरपाई में कुछ राज दफन ही अच्छे हैं तुम हमको जानो हम तुमको क्या अब भी हम तुम बच्चे हैं  तुम मेरे मेहमा बनकर के मेरी मर्यादा रख लेना  न लेना तोहफे ,निशानी भी बस पगड़ी पानी चख लेना बातों की अन बन ही तो है ,रिश्ते तो अपने सच्चे है  तुम हमको जानो,हम तुमको,क्या अब भी हम तुम बच्चे हैं  बचपन की ठिठोली, गाली भी मिश्री सी मीठी लगती थी  वो चाची, काकी बचा लेती ,जब मम्मी पीछे भगती थी  मत तोड़ो नाते चटका के ,ये सीसे से भी कच्चे है  तुम हमको जानो हम तुमको क्या अब भी हम तुम बच्चे हैं

शब्दों के स्त्रोत words come from ?

 🤔 *शब्द निकलते कहाँ से है* 😷 🤔🤔 आज मैं यूं ही सोच रहा था कि जब हम किसी से बात करते हैं तो *शब्द* निकलते कहाँ से है , क्योकि कभी कभी ऐसा होता है कि हम क्या कहने जा रहे हैं वो प्रीप्लांड होता नही है । *हम जब किसी से बात करते हैं तो दो स्थितियों में शब्द बाहर निकलते हैं*  👉 *पहली स्थिति*  जब हम किसी विषय विशेष पर बात करते हैं तो *शब्द* उसी विषय के इर्द गिर्द घूमते रहते हैं, *जैसे*  व्यापार के लिए बात करते समय मस्तिष्क सिर्फ व्यापार सम्बन्धी शब्द प्रेषित करता है , की व्यापार कितने प्रकार का होता है, क्या क्या है, कैसे करते है, कहाँ करें, आदि आदि  👉 *दूसरी स्थिति*  बिना किसी विषय विशेष के *शब्दो* का निकलना  *इसमें भी दो परिस्थिति होती है*  *1* 👉 *मन किस अवस्था मे है - शांत या क्रोधित*  *2* 👉 *हम जिससे बात कर रहे हैं उसका मन किस अवस्था में है -- शांत या क्रोधित*  👉 *पहली अवस्था में जब हमारा मन शांत  होता है तब मष्तिष्क वही 🧠 *शब्द* 🗣 *प्रेषित करता है जो सामने वाले को अच्छा लगे या उसकी प्रश्न प्रकृति से मेल खाता हो* । *किंतु यद...

सात सत्य seven truth an autobiography

 💐 *सात-सत्य* 💐 A STORY, PART OF AUTOBIOGRAPHY *💐एक चोट💐* बचपन में मैं पढ़ने में बहुत तेज था, अंग्रेजी और गणित में 💯 अंक मिलते थे ,कक्षा चार में जब पढ़ रहा था तो कबड्डी खेलते हुए एक अन्य सहपाठी ने हाथ पकड़कर ऐसा नचाया की सरकारी ट्यूबवेल की दीवार से सिर बहुत जोर से टकराया ,शिक्षकों के अनुसार तीन-चार मिनट की बेहोशी के बाद सब सामान्य हो गया किंतु धीरे-धीरे इस मानसिक चोट ने मेरी याददाश्त और कैचिंग पॉवर को क्षीण कर दिया,जिसका सीधा असर मेरे एकेडमिक रिकॉर्डस पर पड़ा -अब सब कुछ लिख कर रखना पड़ता है। *💐पिटाई-विदाई💐* एक बार मेरे पिताजी खेत में गंजी/शकरकंद के पौधे लगा रहे थे उन्होंने मुझे कई बार आवाज दी पर मैंने नहीं सुना, आव देखा ना ताव उन्होंने वही खेत में पड़े आधे गन्ने के डंडे से मेरी खूब पिटाई की पीठ पर फफोले पड़ गए ,इस घटना के बाद कई बार यह दोहराव हुआ , कुछ माह बाद माता-पिता ने इसे गंभीरता से लिया तब पता चला मुझे एक कान से कम सुनाई पड़ता है और फिर इस पिटाई ने मुझे इलाज के लिए अपने बड़े मौसा जी के साथ मुंबई भेज दिया जहां बाद में इलाज के साथ-साथ मेरी पढ़ाई भी पूरे 6 वर्ष चली *💐कुम्भ...

शुध्द पानी 💧 के लिये For Good drinking water

 *💐 शुध्द पानी 💧 के लिये 🌧️* *💐 क्या बेहतर है R.O या मटका💐* लैपिडरी ट्रस्ट और ज्ञान प्रकाश मिश्र बाबुल प्रस्तुत करते हैं *स्वच्छ पानी पीने के उपाय और स्वच्छ पानी पीने के घरेलू नुस्खे*  जैसा की आप सबको पता है कि आजकल आर ओ  का पानी पीने का प्रचलन बढ़ गया है लेकिन क्या आपको यह भी पता है कि आर ओ का पानी कब पीना चाहिए और आर ओ कितने प्रकार के होते हैं 😳⁉️   शायद नहीं 🤔  हमारे पीने के पानी में कुछ ठोस अपशिष्ट पदार्थ मिले हुए होते हैं इनको हम शॉर्ट फॉर्म में टीडीएस कहते हैं  जब पानी में टीडीएस की मात्रा 900 से अधिक होती है तब उसे शुद्ध करने के लिए हमें आर ओ  की जरूरत होती है  लेकिन जब यही टीडीएस की मात्रा 900 से कम होती है और 500 से अधिक होती है तब उसे शुद्ध करने के लिए प्यूरीफायर की एक और तकनीक होती है जिसको हम UV  कहते हैं इस मशीन का प्रयोग करते हैं  और अगर हमारे पानी का टीडीएस 500 से कम है तब ऐसी स्थिति में हम एनएफ या  यूएफ प्यूरीफायर का प्रयोग कर सकते हैं 🤦‍♂️🤔😳🥺🕵️‍♂️ भ्रमित हो रहे हैं न   इन सब की जरूरत ही नह...

सर्व देव आरती AARTEE

 आरती, धूप कपूर पुष्प  से  सब नर नारी सजाए हैं  पूजा करो स्वीकार हमारी  श्रद्धा से शीश झुकाए हैं  प्रथम आरती मातु तुम्हारी  शक्ति की अवतारी हो  तुम ही दुर्गा ,सीता रुकमणी  काली खप्पर वाली हो  संतोषी संतोष का धन दो  शारदा मैहर शक्ति दो  देवी सरस्वती ज्ञान हमें दो  उमा रमा तुम भक्ति दो  सती सावित्री शाकंभरी तुम  नैना ज्वाला कामाख्या  गायत्री के रूप में मैया  कैसे करें महिमा व्याख्या  अपना बालक जान के मैया  सब करती दूर बलाये हैं आरती,धूप  कपूर पुष्प से  सब नर नारी सजाए हैं  पूजा करो स्वीकार हमारी  श्रद्धा से शीश झुकाए हैं  ग्यारह रुद्र अवतार प्रभु का   अश्विन और कुमारे है मत्स्य ,कूर्म ,बाराह, नरसिंही  वामन हरी सुकुमारे है  विश्व रचयिता ब्रह्मदेव  विष्णुपद प्रिय हमारा है  किसे छुए यम शनि अग्नि  जब हनुमत नाम तुम्हारा है  तुम महेश शिव भोले शंभू  पार्वती के प्यारे हो  संग गणेश कार्तिकी नंदी  देवों का कष्ट उबारे हो हे सूर्य चं...

A TRUTH OF VALENTINE DAY 14 FEBRUARY, fourteen Fact about 14 FEBRUARY ,14 फरवरी के चौदह सत्य

 *💐💓 14 फरवरी💓💐* *A TRUTH OF VALENTINE DAY 14 FEBRUARY* *💐रोचक तथ्य और विश्लेषण 💐* *✍️ लेखक - ज्ञान प्रकाश मिश्र 'बाबुल'* *14 फरवरी के 14 सत्य*  14 फ़रवरी अनेक देशों में अनेकों लोगों द्वारा दुनिया भर में मनाया जाता है। विशेषकर अंग्रेजी बोलने वाले देशों में, यह एक पारंपरिक दिन है, जिसमें प्रेमी युगल एक दूसरे से अपने प्रेम का इजहार वैलेंटाइन कार्ड या फूल देकर करते हैं, क्या हमने कभी यह सोचने या समझने का प्रयास किया कि पूरा देश जिस अंध गति से  इस प्रेम परंपरा के पीछे दौड़ चला है उसके पीछे की असली कहानी क्या है ? .........??   नहीं ना तो आइए आज थोड़ा सा समय निकाले और यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर में 14 फरवरी के पीछे का वह सत्य क्या है जिसके पीछे आज पूरी दुनिया पागल सी हुई प्रेम पुजारी बनकर घूम रही है *फैक्ट नम्बर 1*  *पहला सत्य* वास्तव में यह एक ईसाई संतों का शहीदी दिवस है, जिन्होंने 200 ईसवी के आसपास ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार करने और इसाई धर्म को मान्यता देने में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, रोम के संत वैलेंटाइन रोम के एक पादरी थे जिनको लगभग 26...

मलमास -- एक वैदिक परिष्करण का मास A Leap year concept in ancient indian HINDU Calander system known as PURUSHOTTAM MAAS , MAL MAAS , ADHIK MAAS

 *मलमास -- एक वैदिक परिष्करण का मास* ===================== *सौर-वर्ष का मान ३६५ दिन, १५ घड़ी, २२ पल और ५७ विपल हैं। जबकि चांद्रवर्ष ३५४ दिन, २२ घड़ी, १ पल और २३ विपल का होता है। इस प्रकार दोनों वर्षमानों में प्रतिवर्ष १० दिन, ५३ घटी, २१ पल (अर्थात लगभग ११ दिन) का अन्तर पड़ता है। इस अन्तर में समानता लाने के लिए चांद्रवर्ष १२ मासों के स्थान पर १३ मास का हो जाता है।* *वास्तव में यह स्थिति स्वयं ही उत्त्पन्न हो जाती है, क्योंकि जिस चंद्रमास में सूर्य-संक्रांति नहीं पड़ती, उसी को "अधिक मास" की संज्ञा दे दी जाती है तथा जिस चंद्रमास में दो सूर्य संक्रांति का समावेश हो जाय, वह "क्षयमास" कहलाता है। क्षयमास केवल कार्तिक, मार्ग व पौस मासों में होता है। जिस वर्ष क्षय-मास पड़ता है, उसी वर्ष अधि-मास भी अवश्य पड़ता है परन्तु यह स्थिति १९ वर्षों या १४१ वर्षों के पश्चात् आती है। जैसे विक्रमी संवत २०२० एवं २०३९ में क्षयमासों का आगमन हुआ तथा भविष्य में संवत २०५८, २१५० में पड़ने की संभावना है* *मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मलमास पड़ गया है।* *अंग्रेजी कैलेंडर में हर 4 साल बाद एक...