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सात सत्य seven truth an autobiography

 💐 *सात-सत्य* 💐

A STORY, PART OF AUTOBIOGRAPHY


*💐एक चोट💐*

बचपन में मैं पढ़ने में बहुत तेज था, अंग्रेजी और गणित में 💯 अंक मिलते थे ,कक्षा चार में जब पढ़ रहा था तो कबड्डी खेलते हुए एक अन्य सहपाठी ने हाथ पकड़कर ऐसा नचाया की सरकारी ट्यूबवेल की दीवार से सिर बहुत जोर से टकराया ,शिक्षकों के अनुसार तीन-चार मिनट की बेहोशी के बाद सब सामान्य हो गया किंतु धीरे-धीरे इस मानसिक चोट ने मेरी याददाश्त और कैचिंग पॉवर को क्षीण कर दिया,जिसका सीधा असर मेरे एकेडमिक रिकॉर्डस पर पड़ा -अब सब कुछ लिख कर रखना पड़ता है।



*💐पिटाई-विदाई💐*

एक बार मेरे पिताजी खेत में गंजी/शकरकंद के पौधे लगा रहे थे उन्होंने मुझे कई बार आवाज दी पर मैंने नहीं सुना, आव देखा ना ताव उन्होंने वही खेत में पड़े आधे गन्ने के डंडे से मेरी खूब पिटाई की पीठ पर फफोले पड़ गए ,इस घटना के बाद कई बार यह दोहराव हुआ , कुछ माह बाद माता-पिता ने इसे गंभीरता से लिया तब पता चला मुझे एक कान से कम सुनाई पड़ता है और फिर इस पिटाई ने मुझे इलाज के लिए अपने बड़े मौसा जी के साथ मुंबई भेज दिया जहां बाद में इलाज के साथ-साथ मेरी पढ़ाई भी पूरे 6 वर्ष चली



*💐कुम्भकर्ण सी नींद💐*

मैं आज भी खूब सोता हूं -- एक बार मुंबई के सांताक्रूज इलाके में मैं मौसी के साथ दक्षिण भारतीय नमकीन चकली मुरकू और कुछ शॉपिंग के उद्देश्य से गया था -- कुछ सामान लेने के बाद उन सामानों के साथ मुझे स्टेशन पर बिठाकर मौसी दोबारा शॉपिंग के लिए चली गई रात के लगभग 8:30 बजे के आसपास मैं स्टेशन पर इंतजार करते हुए बैठे-बैठे सो गया लगभग 1 घंटे बाद जब मौसी वापस आए तो मैं सोया था और सामान गायब, इधर-उधर हम दोनों सामान खोजने लगे, डर और आतंक से मैं पसीना पसीना हो गया था-- मैं सामान खोजते खोजते उनकी नजरों से बचने का प्रयास करने लगा - 2 घंटे तक मैं वही घूमता रहा ,खोजता रहा उसके बाद  एक लोकल ट्रेन पकड़ कर मैं दादर की तरफ निकला, किंतु तब तक और रात हो चुकी थी फिर नींद आ गई, सोते-सोते मैं चर्चगेट पहुंच गया वहां फिर जब नींद खुली तो दरवाजे से बाहर निकल कर देखा, वही ट्रेन विरार जाने वाली थी मैं उसी में फिर बैठा रहा कि दादर उतर जाऊंगा लेकिन लौटते वक्त फिर सो गया और पता नहीं कब ट्रेन विरार के कारशेड में पहुंच गई मैं सोता ही रहा -- सुबह फिर उसी ट्रेन में बैठे बैठे विरार से दादर तक की यात्रा की और इस बार दादर में उतर गया और डोंबिवली पहुंचा, वहां पहुंचने में मुझे दोपहर के 12 बज गए , अब तक पूरे मुंबई के सभी लोकल स्टेशनों पर सेंट्रलाइज्ड अनाउंसमेंट हो चुकी थी,  जीआरपी में मिसिंग कंप्लेंट दर्ज हो चुकी थी ---  लेकिन इस घटना के बाद भी मेरे सोने 🙇🏼‍♂️में कोई परिवर्तन नहीं हुआ😆😆😆


*💐एक का डर दूसरे पर भारी💐*

मुंबई में पढ़ने का मतलब यहां की लोकल लैंग्वेज मराठी पढ़ना अनिवार्य था -- जब मैं हाई स्कूल में पहुंचा तो इस भाषा को साधने के चक्कर में मैंने गणित ,विज्ञान और अंग्रेजी जैसे अन्य विषयों पर बहुत कम बल दिया क्योंकि यह डर था कि लोकल लैंग्वेज में फेल होने के बाद कोई भी विषय हाई स्कूल में मुझे पास नहीं करा सकता , इसका परिणाम यह हुआ कि मराठी में तो मैं पास हो गया लेकिन गणित में पास होने के लिये साइंस कंबीनेशन के नियम से मदद मिली- फलस्वरूप प्रथम प्रयास में ही हाई स्कूल पास होने में सफलता मिली और इस सफलता के पीछे मेरे मौसा जी का बहुत बड़ा हाथ था, उन्होंने मुझे बहुत इनकरेज किया मराठी सिखाई और मेरा भरपूर सहयोग किया 🙏🙏


*💐प्यारी बहन का जाना💐*

मेरे दो बहने थी पहली मुझसे 2 साल छोटी और दूसरी मुझसे लगभग 10 साल छोटी , मुझे मेरी बड़ी बहन के संदर्भ में जनरल डिसीज ट्रीटमेंट के दौरान यह पता चला कि उसके हृदय वाल्व में छिद्र है जिसका तत्काल इलाज कराया जाना बहुत जरूरी है उस समय उसकी शादी भी तय हो चुकी थी हमने इलाज के लिए मुंबई के टाटा हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट भी ले लिया था जनवरी 2000 की अपॉइंटमेंट थी लेकिन डिजीज का पता हमें बहुत देर से चला और अचानक दिसंबर 1999 में मेरी बहन का देहावसान हो गया इस घटना ने ना सिर्फ मुझे बल्कि मेरे परिवार को बहुत तोड़ दिया था -जिस परिवार से बहन का रिश्ता तय हुआ था, वो मेरे परिवार (मेरी बहन के गुण, रंग ,ढंग,शिक्षा ) से इतना प्रभावित थे कि उन्होंने हमारे द्वारा बताए गए दूसरे परिवार से ही लड़के का रिश्ता तय किया और शादी की 💐


*💐उपासना का फल💐* 

मैं सभी देवी देवताओं में शक्ति की उपासना अधिक करता हूं -- *पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्।  तारिणींदुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥* इसके प्रभाव से मुझे मेरे जीवन साथी के रूप में सर्वगुण संपन्न अर्धांगिनी मिली और वैवाहिक जीवन के 10 वर्ष के विषम दौर से गुजरने के बाद मेरे दो अनमोल रत्न एक पुत्र और एक पुत्री के स्वरूप में दो पुष्प पल्लवित हुए


*💐आर्थिक संघर्ष💐*

आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह पहले होता है और उसके बाद लोग धन अर्जन के उद्देश्य से नौकरी या धंधा करना शुरू करते हैं , कमोवेश लगभग यही मेरे साथ भी हुआ वर्ष 2001 में मैंने मुंबई (मस्जिद बंदर ) की एक कोरियर कंपनी से अपने कैरियर की शुरुआत की , हालांकि इससे पहले मैं एक शिक्षक के रूप में जूनियर हाई स्कूल में पढा चुका था, वर्ष 2006 में मुझे बिरला कम्पनी की मदुरा गारमेंट में 1 लाख की पैकेज जॉब दिल्ली में मिली, पर सेहत ने साथ नही दिया और वापस टीचिंग सेक्टर में आ गया , टर्निंग प्वाइंट फिर वर्ष 2010 में आया जब - भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एंप्लॉयमेंट विभाग में *लेबर इंस्पेक्टर* के पद पर अंशकालिक नियुक्ति मिली जहां वर्ष 2017 तक कार्य किया , *इस सेवा के माध्यम से मुझे संपूर्ण भारतवर्ष के भ्रमण का अवसर मिला* तब से अब तक कई प्राइवेट एनजीओ में *रिसर्च एसोसिएट* के रूप में कार्य किया, इन्हीं सबके बीच में समाज से जुडे रहने के उद्देश्य से एक प्रतिष्ठान कंप्यूटर सेंटर भी चलाया,जिसमे जन सामान्य सेवाएं और प्रशिक्षण देता रहा, साथ ही  इंटर कॉलेज में भी बतौर इकोनॉमिक्स लेक्चरर, प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल ,परीक्षा प्रभारी के पद पर सेवा देता रहा , लगातार असफलता-सफलता का प्रयास चलता रहा , किंतु हार नहीं मानी क्योंकि कर्म अपने अधिकार में है और फल उस परमपिता परमेश्वर के 🙏🙏🙏


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*इन सात सत्य के अलावा एक सत्य यह भी है कि मैं एक लेखक और कवि के रूप में भी कार्य करता रहता हूं , मेरी एक संकलन कृति 💐 ज्ञान का कैप्सूल💐 नामक पुस्तक के रूप में आ चुकी है - ये प्रकृति और ईश्वर की देन है इसलिए यह सब लिख पाया और आगे एक ऑटोबायोग्राफी के रूप में आप सब को पढ़ने को मिल सकती है, आप सब मेरी ब्लॉग http://gyankacapsule.blogspot.com भी पढ़ सकते हैं*

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