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हिंदी हिन्द की शान - Hindi Divas

 है हिन्दी हिन्द की शान  ये देश है हिन्दुस्तान , है प्यारा देश महान , यें भारत मेरी जान  हिन्द शीश पर लहराता है लह-लह कर तिरंगा  हिन्द पादुका चरण पखारे कल-कल करती गंगा ।। नाम हिन्द है, काम हिन्द का , हिन्दीं इसकी जान  नाम ज्ञान है, काम ध्यान है ,हिन्दीं मेरी शान  जहाँ रहूँ मैं, जो भी करूं मैं, करूँ हिन्द गुणगान ये देश है हिन्दुस्तान हिन्द बाहु में बज्ररूप है, खड़ा हिमालय संगा  हिन्द काहु में नहीं मंद है, सबसे है यह चंगा । गान हिन्द की,  जान हिन्द की , अपनी समझूं जान  हिंदी हिन्द की, बिन्दी हिन्द की, कंगना हिन्द की शान जहाँ मरूँ मैं, जहाँ जलूँ मै --  करके हिन्द गुणगान ये देश है हिन्दुस्तान  ये हिन्दी हिन्द की शान , ये भारत देश महान  ये देश है हिन्दुस्तान ।।

मेरे जीवन की अल्फाबेट

 तुम मेरे जीवन की अल्फाबेट  तुम प्यारी मेरी कुसुमकली ।  कोई नाम नहीं तेरा प्रियतम  नाजों से मेरे संग खिली  ।।  A से आत्मा मेरी हो  B से बदनों की महक तुम्ही  C चाहे तुमको प्राणों सा  D से दिल की हो धड़क तुम्ही  E इतरा कर बलखा के चली  तुम प्यारी मेरी कुसुमकली  कोई नाम नहीं तेरा प्रियतम  नाजों से मेरे संग खिली  ।।  तुम मेरे जीवन की अल्फाबेट  तुम प्यारी मेरी कुसुमकली ।  F फंगस सा मै चिपका रहूं  G बन जाओ तुम घिबली सी  H हंसती हो तो फूल झरे  I  तुम बनके बिजली सी  J से जिगरा की स्वांस नली  तुम प्यारी मेरी कुसुमकली।। कोई नाम नहीं तेरा प्रियतम  नाजों से मेरे संग खिली  ।।  तुम मेरे जीवन की अल्फाबेट  तुम प्यारी मेरी कुसुमकली । K क्यूं इतना तड़पाती हो  L से लव है तुमसे,  मुझको  M से ममता की मूरत हो  N नॉटी लगती हो मुझको  O ओ!! दिल लेके कहां चली तुम प्यारी मेरी कुसुमकली  कोई नाम नहीं तेरा प्रियतम  नाजों से मेरे संग खिली  ।।...

वो अनकही बात...! The UnTold story...

 "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः"। मनुस्मृति के इस श्लोक में बताया गया है कि, जहाँ नारी की पूजा होती है वही देवताओं का वास होता है।  पूजनीय नारी को हमारा समाज इतनी हीन दृष्टि से क्यों देखता है ? की जैसे स्त्री केवल एक काम वासना की चीज है । उसके शरीर और  अंगों की व्याख्या हम अपनी भ्रांतियों के आधार पर क्यों करते है ? जबकि सत्य कुछ और ही है ।  इस लेख में हम स्त्री के शारीरिक ढांचे  से जुड़े ऐसे चार बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे  जिनके बारे में हम आपस में खुलकर न कुछ बोलना और न ही चर्चा करना पसंद करते हैं  ....... इस कारण  लोग सच और भ्रांति (भ्रम ) के बीच झूलते रहते है किंतु विमर्श करने में  होंठ सिल जाते है  हम बात करेंगे स्त्रियों के लिप्स (होंठ ) से लेकर  हिप्स ( नितंब ) तक के कुल चार  विशिष्ट अंगों की , जिनके संबंध में बहुत सारे मिथक समाज में फैले है जिनके डर से स्त्रियां  अपने जीवन के वास्तविक सुख से समझौता कर लेती हैं , किंतु ये लेखक का दावा है कि इस लेख को दो - तीन बार ध्यान से पढ़ने के बाद आपके सारे ...

कैसी लिखी गई हनुमान चालीसा ✍️ How was Hanuman Chalisa written?

हनुमान चालीसा की रचना कैसे हुई भगवान को अगर किसी युग में आसानी से प्राप्त किया जा सकता है तो वह युग है कलियुग। इस कथन को सत्य करता एक दोहा श्री रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने लिखा है कलियुग केवल नाम अधारा । सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा।। भावार्थ यह है की कलयुग में मोक्ष प्राप्त करने का एक ही साधन है, और  वो है भगवान का नाम जप । तुलसीदास जी ने अपने पूरे जीवन काल में कोई भी ऐसी बात नहीं लिखी जो तर्कसंगत न हो। ऐसा माना जाता है कि कलयुग में हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न हो जाने वाले भगवान हैं। तुलसीदास जी ने हनुमान जी की स्तुति में कई रचनाएँ करी है ,  जिनमें हनुमान बाहुक, हनुमानाष्टक और हनुमान चालीसा प्रमुख हैं। हनुमान चालीसा की रचना के पीछे एक बहुत जी रोचक घटना है जिसकी जानकारी शायद ही किसी को हो।  आइये जानते हैं हनुमान चालीसा की रचना की कहानी  ये बात उस समय की है , जब भारत पर मुग़ल सम्राट अकबर का शासन था।  एक दिन सुबह के  समय  एक महिला ने पूजा से लौटते हुए तुलसीदास जी के पैर छुए , तुलसीदास जी ने प्रत्युत्तर  में  उसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दे द...

कौन है हमारा असली VALENTINE

 जिस दिन हम इस मोह माया के सांसारिक प्रपंच से #breakup कर लेंगे  और ईश्वर के #roses रूपी चरणों में अनुराग हो जाएगा   मेरे राघवेंद्र सरकार का #promise  है  कि उसी दिन से दुनिया की कोई ताकत आपसे #flert नहीं कर पाएगी  कोई आप को #kick  नहीं कर पाएगा   एक बार एहसास करके देखिए की आपके जीवन में क्या #missing है   मेरी जगत जननी के सामने एक बार अपनी अज्ञानता का #confession करके तो देखिए  वो असीम शक्ति इतनी दयालू है कि तुरंत ही आपको अपनी शरण चरण से उठाकर #hug  कर लेगी  एक बार हृदय से उन्हें #propose  करके तो देखिए   इंसान के रूप में जीव उस माया पति ईश्वर का बनाया सबसे प्यारा #teddy  है   वो कभी अपने शरणागत को ही नहीं,  नीच से नीच ,अधम पापियों को भी #slap  नहीं लगाती  ..... बल्कि हमारे अपराधों को विस्मृत करके हम सब को उपहार #chocolate  भी देती है   मेरे स्वामी के भक्ति की #perfumes  में  इतनी ताकत है , की बड़ी से बड़ी विपदा भी इस सुगंध के प्रभाव  से ...

शरद पूर्णिमा SHARAD POORNIMA KI KHEER

आश्विन पूर्णिमा/शरद् पूर्णिमा / कोजागिरी पूर्णिमा  ====================== शरद ऋतु की पूर्णिमा को शरद् पूर्णिमा कहते हैं. हिन्दू धर्म में शरद् पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है. शरद् पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर चांदनी रात में रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. ऐसा माना जाता है ऐसा करने से खीर में औषधीय गुण आ जाते हैं जिसे ग्रहण करने पर व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ होता है। इस दिन खीर बनाने का तरीका बाकी दिनों की तुलना में थोड़ा अलग होता है. शरद् पूर्णिमा के दिन खीर बनाने के लिए व्यक्ति को कुछ खास नियमों का पालन करना पड़ता है. जिसकी अनदेखी करने पर व्यक्ति को इस व्रत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है. आइए जानते हैं क्या है इस दिन खीर से जुड़े ये कुछ खास नियम। *खीर का बर्तन कैसा हो* ============≈===== सबसे पहले खीर बनाते समय या चांदनी रात में रखने से पहले उसके पात्र का ध्यान रखें. शरद् पूर्णिमा के दिन खीर किसी चांदी के बर्तन में रखें. यदि चांदी का बर्तन घर में मौजूद न हो तो खीर के बर्तन में एक चांदी का चम्मच ही डालकर रख दें. इसके अलावा आप खीर रखने के लिए मिट्टी, कांसा या पीतल के ब...

भारत 'रतन ' टाटा BHARAT 'RATAN' TATA

 रतन टाटा    देश के बड़े उद्योगपति रतन टाटा का निधन हो गया। उन्होंने 86 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज चल रहा था। हालांकि 8 oct.2024  को  दोपहर में रतन टाटा ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी कि वह ठीक हैं और पोस्ट में लिखा था कि वो अस्पताल में रूटीन चैकअप के लिए गए थे। उन्होंने कहा कि मेरी चिंता करने के लिए सभी का धन्यवाद, लेकिन मैं एक दम ठीक हूं। चिंता की कोई बात नहीं है। 28 दिसंबर 1937 को हुआ था जन्म देश की जानी मानी हस्ती रतन टाटा को भारत के दो सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण (2000) और पद्म विभूषण (2008) से भी सम्मानित किए जा चुका है। रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को सूरत में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम नवल टाटा और सूनी कमिसारीट था। जब रतन टाटा 10 साल के थे, तब वे अपने माता पिता से अलग हो गए थे। उसके बाद उन्हें जेएन पेटिट पारसी अनाथालय के माध्यम से उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने औपचारिक रूप से गोद ले लिया था। रतन टाटा का पालन-पोषण उनके सौतेले भाई नोएल टाटा (नवल टाटा और सिमोन टाटा के...