वो अनकही बात...! The UnTold story...

 "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः"। मनुस्मृति के इस श्लोक में बताया गया है कि, जहाँ नारी की पूजा होती है वही देवताओं का वास होता है।  पूजनीय नारी को हमारा समाज इतनी हीन दृष्टि से क्यों देखता है ? की जैसे स्त्री केवल एक काम वासना की चीज है । उसके शरीर और  अंगों की व्याख्या हम अपनी भ्रांतियों के आधार पर क्यों करते है ? जबकि सत्य कुछ और ही है ।

 इस लेख में हम स्त्री के शारीरिक ढांचे  से जुड़े ऐसे चार बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे  जिनके बारे में हम आपस में खुलकर न कुछ बोलना और न ही चर्चा करना पसंद करते हैं  .......

इस कारण  लोग सच और भ्रांति (भ्रम ) के बीच झूलते रहते है किंतु विमर्श करने में  होंठ सिल जाते है 

हम बात करेंगे स्त्रियों के लिप्स (होंठ ) से लेकर  हिप्स ( नितंब ) तक के कुल चार  विशिष्ट अंगों की , जिनके संबंध में बहुत सारे मिथक समाज में फैले है जिनके डर से स्त्रियां  अपने जीवन के वास्तविक सुख से समझौता कर लेती हैं , किंतु ये लेखक का दावा है कि इस लेख को दो - तीन बार ध्यान से पढ़ने के बाद आपके सारे मिथक  / भ्रम दूर हो जाएंगे और वास्तविकता से आपका परिचय हो जाएगा।


आइए सबसे पहले हम बात करते है लिप्स (होंठ ) की , जिनके गुलाबी होने ,शराबी होने   की ढेरों शेरों शायरी आप पढ़ और सुन चुके है  ,किंतु इनका महत्व हमें आज भी पता ही नहीं  है , मै आपको होठों की वास्तविकता से अवगत कराता हूं।

अगर  पुरुष होंठो पर किस करता है तो इसका मतलब है कि वह  आप से बहुत प्यार करता है , और आपकी तरफ आकर्षित है ,  यह सच है कि महिलाएं तभी किसी पुरुष को लिप किस करने के लिए राजी होती हैं ,जब वह उससे फिजिकल रिलेशन के लिए कम्फर्टेबल होती हैं। 


होठों पर किस करने से कई फ़ायदे होते हैं ......!!!???

होंठों को चूमने से आपकी त्वचा में रक्त प्रवाह बढता है। 

रक्त प्रवाह बढ़ने से त्वचा की लालिमा बढ़ती है, शरीर में कॉलेजन और इलास्टिन का उत्पादन भी बढ़ जाता है, (ये त्वचा को पोषण देने वाले प्रोटीन हैं ) ।

पीरियड्स के दौरान लिप किस करने से दर्द और ऐंठन कम होती है ।  यह आनंददायक होता है,  चिड़चिड़ापन कम होता है, ऑर्गेज़्म तक पहुंचने में मदद मिलती है, हार्मोनल बदलावों के कारण यौन पिपासा बढ़ती है। इससे हैप्पी हॉर्मोन बूस्ट होते हैं , भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है, आत्मविश्वास बढ़ता है, कॉलेस्ट्रॉल लेवल मेंटेन होता है, कैलोरी बर्न होती है, एलर्जी से राहत मिलती है, इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है, सिरदर्द जैसी समस्याओं से राहत मिलती है, मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन, डोपामाइन, और सेरोटोनिन जैसे रसायन बनते हैं जो हमें आनंद देने वाले मस्तिष्क केंद्रों को जागृत करते हैं , किस करने से कोर्टिसोल हार्मोन कम होता है  जो तनाव बढ़ाने वाला एक हार्मोन है । लिप किस  (चुम्बन ) के ऐसे लगभग  16 स्वास्थ्य लाभ है । इसके साथ ही  - होंठ चुंबन जब ऑक्सीटोसिन  हार्मोन की रिहाई  करता है तब हमारा सामने वाले  के साथ स्नेह और लगाव के साथ साथ  भावनात्मक संबंध जुड़ जाता  है। यह दीर्घकालिक संबंधों को बनाए रखने में मदद करता है, यही नहीं  होंठ चुंबन से लार का  स्राव बढ़ जाता  है, जो मुंह में हुए  संक्रमण के रोगाणुओं से  लड़ने में मदद करता है।  होंठ के किस से / चुंबन से चेहरे की लगभग 24  मांसपेशियों की कसरत हो जाती है जो  की  चेहरे की मांसपेशियों को कसने में मदद करती है । किस, फोरप्ले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो उत्तेजना को बढ़ाता है और संसर्ग संबंध को एक नया अनुभव प्रदान करता है। 

अब एक खास बात और ..... किस करते समय आंखें खुद-ब-खुद बंद हो जाती हैं, क्योंकि हमारा दिमाग सिर्फ किस पर फोकस करने की कोशिश करता है। इस दौरान हम किस से जुड़े दूसरे एहसासों, जैसे कि फिजिकल टच, स्वाद और महक पर ज्यादा ध्यान देने की कोशिश करते है  जिसके कारण आंखे बंद हो जाती हैं,  और यही  वजह  ; किस (चुंबन / लिप लॉक ) को और ज्यादा मजेदार बनाती है । 

अब आइए जानते है कि किस या चुंबन ; कौन सी जगह पर क्या भाव उत्पन्न कराता है 

माथे पर चुंबन ****

माथे पर किस , प्यार जाहिर करने का सबसे पवित्र तरीका माना जाता है। यह आपके रिश्ते में स्नेह और सुरक्षा का एहसास कराता है ।

गाल पर चुंबन ****

 गाल पर चुंबन लेने का मतलब है प्रेम और वात्सल्य का इजहार करना । यह दोनों के बीच लगाव और आपसी जुड़ाव को दर्शाता है।

हाथ पर चुंबन ****

हाथों को चूमना , कई बार ऐसा किसी की प्रंशसा के लिए भी किया जाता है। कभी-कभी कोई अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए भी हाथ चूम लेता है। इसका एक मतलब यह भी हो सकता  है कि दूसरा व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित है ।

होंठ पर चुंबन ****

होंठो पर किस करना इंटेमेसी को दर्शाता है। यदि आप किसी से लंबे समय से  और गहरे प्यार में हैं तो ये किस आपके समर्पण का प्रतीक है । 

कान पर चुंबन ****

कान के किस को  ईयरलोब  कहते हैं। इस किस को रोमांटिक किस माना जाता है। प्यार करने वाले अपने पार्टनर को इस तरह का किस करके रोमांस का एहसास करवाते हैं।

इतना सब जानने के बाद, अब एक प्रश्न यह उठता है कि अगर किसी को  होंठ या मुँह  का संक्रमण हो तो क्या चुंबन कर सकते हैं  ? 

  यूं तो चुंबन (किस ) स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है, किंतु किसी के साथ लार का आदान-प्रदान कुछ प्रकार के  रोगों का कारण बन सकता है; जैसे .....

सर्दी  -:  किस करने के दौरान संक्रमित व्यक्ति की नाक और गले से निकलने वाली लार के साथ सीधे संपर्क द्वारा हो सकती है  ।

ग्रंथियों का बुखार  -:  यह बीमारी भी चुम्बन के साथ फैले  संक्रमण , ( मोनोन्यूक्लिओसिस ) के कारण होती है,  एपस्टीन वायरस लार के माध्यम से फैलता है, और संक्रमण होंठ चुंबन के संपर्क के माध्यम से होता है 

हरपीज संक्रमण -:  अगला है हरपीज वायरस , इसके संचरण का कारण  भी लिप लॉक किस बन सकता है , जो कि  फफोले ठीक होने के बाद भी दूसरों में फैल जाता है । 

इन सब के साथ यदि आप संक्रमण से बचना चाहते हैं ,  तो आप या किसी अन्य व्यक्ति को  जिसे बुखार या ठंड के साथ बुखार  हो ,होंठ या मुंह के आसपास अल्सर हो ,तो लिपकिस  / चुंबन से बचना होगा  । दांतों को ब्रश , मसाज और कुल्ला  करके  अपने मुँह की स्वच्छता बनाए रखें  । 

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आइए अब बात करते हैं, बिंदु विषय संख्या दो पर 
दूसरा महत्वपूर्ण अंग है - वक्षस्थल । स्तन सबसे संवेदनशील अंग है। और स्त्री देह की सारी सृजन क्षमता स्तनों के आस-पास है।

 स्तन क्यों ....? बिना स्तन किसी भी स्त्री की कल्पना  करना व्यर्थ है.....!!!!!

स्त्री की सौंदर्यता  को बनाये रखने में उनके स्तनों /वक्षस्थल  का विशेष महत्व होता  है , क्योंकि स्तन मण्डल (वक्षस्थल) यदि ढीले , अति छोटे और कमजोर होते हैं, तो उसकी शारीरिक सौंदर्यता कम हो जाती  है,  इसी प्रकार यदि उसके  स्तन आकर्षक, कसे ,प्राकृतिक रूप से सुडौल होते हैं तो वह नारी की सौंदर्यता को और अधिक निखार देते हैं  ।

स्त्रियों में छाती /  स्तन का विकास , प्राकृतिक शारीरिक विकास की एक अवस्था है,  जो महिलाओं के गर्भधारण और स्तनपान कराने  की क्षमता को संतुलित करता है। 

              भ्रम  हैं कि महिलाओं के स्तन दबाने या चूसने से बड़े हो जाते हैं, तो यह जान लें कि शोधो के मुताबिक  अब तक ऐसा कोई भी प्रमाणिक सत्य सामने नहीं आया है , जिससे यह कहा जाए कि महिलाओं के स्तन दबाने से  या पीने से बड़े हो जाते हैं। हालांकि, यह बात भी सच है कि जब कोई महिला उत्तेजित होती है तो उनके  ब्रेस्ट में रक्त का संचार बढ़ने लगता है। जिसके कारण कुछ देर के लिए  उनके स्तन बड़े  हो जाते  है । ऐसे ही अगर कोई महिला स्तनपान कराती है तो उनके स्तन बढ़ जाते हैं, किंतु यह कुछ समय के लिए ही अर्थात अस्थाई होते है , यदि कोई महिला ऐसा सोचती है कि अगर उनका पार्टनर उसका स्तन  चूसता हैं या दबाता हैं, तो उनकी छाती  बड़ी हो जाएगी ; तो  ये सिर्फ एक मिथक है ।  किसी भी महिला के स्तन तभी बढ़ते हैं जब उनके हार्मोन का विकास होता है।  वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो ऐसा देखा गया है कि महिलाओं के स्तन में अस्थाई सूजन से  भी उनके स्तन बड़े दिखाई देते हैं ।  इसी तरह मासिक धर्म के समय भी  महिलाओं के स्तन बड़े दिखाई दे सकते हैं । 


यह विकास जीनों के प्रभाव और जीवन के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। स्तनों का विकास अधिकांशतः  जीवन के चरणबद्ध विकास के अनुसार  - जैसे कि प्रकृति की अवधि, गर्भावस्था,  पैतृक गुण , मासिक धर्म आदि पर निर्भर होता है ।  स्तनों का विकास और  शारीरिक विकास अधिकांशतः एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनों के प्रभाव से नियंत्रित होता है।


आजकल वक्षस्थल  दिखाना फैशन सा हो गया है ? 

या मजबूरी है ?

 ... और अगर दिखाना ही है तो दूसरे को क्यों दिखाना...?

 स्त्री के स्तनों से स्त्री का सारा व्यक्तित्व  जुड़ा होता है । जब तक एक स्त्री माँ नही बन जाती, तब तक उसकी सारी ऊर्जा पूरी तरह से स्तनों तक पहुँच ही नहीं पाती है  ।  वक्ष , शारीरिक सौंदर्यता के साथ साथ फिजिकल रिलेशन के रोमांच को बढ़ाने में  भी काफी मदद करते हैं। 

अब प्रश्न उठता है कि पुरूष के शरीर में स्तन क्यों होते है। जब कि उनकी कोई आवश्यकता  ही नहीं होती  ? क्योंकि पुरूष किसी बच्चे को दूध तो पिलाता नहीं  !!!  फिर  पुरुषों में इसकी क्या आवश्यकता है ? तो उत्तर यह है कि मानव में यह एक फिजिकल स्ट्रक्चर है जो स्त्री और पुरुष में एक सा होता है ।

        पश्चिमी देशों में बच्चों को सीधे स्तन से दूध न पिलाने का फैशन हो गया है । यह बहुत खतरनाक है।  क्योंकि इसके कारण  स्त्री कभी अपनी सृजनात्‍मकता के केंद्र तक पहुंच ही नहीं  पाती ।   जब एक पुरूष किसी स्त्री से प्रेम करता है , तो वह उसके स्तनों से भी प्रेम करता है ।  किंतु उसे  "मां " नहीं कह सकता , केवल उसका जना  बच्चा ही उसे  "मां " कह सकता है।

स्त्री के स्तन पवित्रता के केंद्र बिंदु होते हैं ।  भूख की पहली संतुष्टि इन्ही से मिलती हैं, मातृत्व के इसी सुख को ,  इस अनुभव को जीने को,  स्त्री स्वयं  ही दिखावे के रूप में,  अपने सौंदर्य के दर्शन  स्तनों से करवाती हैं ।  उनके उभार को प्रदर्षित करवाती हैं, तभी तो नई, नई स्टाइलिश चोली, ब्लाउस  , ब्रा  का चलन चल  हो रहा हैं , और स्त्रियां उन्हें पसंद भी कर रही है ।  भरी महफ़िलों में,  ये वक्षस्थल पुरुषों की नजरों को अनायास ही अपनी तरफ आकर्षित कर लेते है , इस आकर्षण को क्या नाम दे --  पुरुषों की गुदगुदाती  नज़र या  नारी का देह प्रदर्शन  ?? 

सच बात तो यह है कि स्त्री अपने आप में पूर्ण कला है , स्त्री के अंदर काम, क्रोध, लोभ, लालच ,स्वार्थ ,ईर्ष्या ,द्वेष, प्रेम ,करुणा ,दया, ममता, स्नेह सब कुछ  है ।   बिना स्त्री के संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती , बहुत से काव्य, साहित्य, चित्र,मूर्तियां सब कुछ स्त्री के स्तनों से जुड़े है। ऐसा लगता है जैसे  पुरूष को स्त्री के पूरे शरीर की अपेक्षा उसके स्तनों में अधिक रस मिलता है ? यह कोई नई बात नहीं है। सच भी है !!  गुफाओं में मिले प्राचीनतम चित्र में भी स्त्री के स्तनों  को सबसे महत्‍वपूर्ण दिखाया गया  है। वक्ष ,स्त्रियों को पूर्ण नारी और एक स्त्री को माँ बनाने में सहायक होते हैं। स्तनों के बिना नारी की कल्पना की ही नहीं जा सकती है। 


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स्त्री शरीर का सबसे प्रमुख अंग है  जननांग और उसका बाह्य रूप ' योनि '  जिसे अंग्रेजी भाषा में वेजाइना कहते हैं, यह अंग करीब-करीब संवेदन रहित होता  है ।

 इस  अंग के बारे में  सबसे बड़ी मिथक और भ्रांति ये है कि  अक्सर पुरुष अपने यौन सुख की अनुभूति करने के लिए स्त्री के जननांग की गहराई  को भांपने का प्रयोग करता है, और स्त्री अपने पुरुष साथी के जननांग की लंबाई नापने का प्रयोग करतीं है  -- किंतु यह सिर्फ एक मिथक है ,और कुछ नहीं 

संबंधों में  चरम यौन सुख के लिए स्त्री जननांग का गहरा होना या पुरुष जननांग का लम्बा होना कोई पैमाना नहीं है , दरअसल .............

              ....... स्त्रियों के जननांग में  भगनासा  ही एक प्रकार से बिजली का स्विच है । भग अर्थात  (योनि ) के अंदर मूत्र छिद्र से एक इंच ऊपर एक उभार सा होता है, जिसे भगनासा कहा जाता है। इसमें भी  पुरुष  के लिंग की ही  तरह खोखले कोष होते हैं। भगनासा में लगभग 8 हजार सेंसिटिव नर्व एंडिंग्स होती  हैं, और लगभग इतने ही  सेंसिटिव नर्व एंडिंग्स  पुरुष के लिंग में भी  होते हैं ।  मूलतः  स्त्रियों की योनि में स्थित भगनासा, पुरुष के शिश्नाग्र के जैसा ही होता है और यौन उत्तेजना प्राप्त करने में वह सबसे अधिक  संवेदनशील होता है।  

यही  "भगनासा " ही  स्त्रियों में यौन उत्तेजना ,यौन पिपासा को बढ़ाने, शांत करने  का कार्य करती है ।

   सहवास के दौरान, संभोग से पहले भगनासा को छूने, सहलाने, दबाने या मलने से स्त्री कामातुर हो उठती है।  स्तन के बाद  सबसे संवेदनशील अंग भगनासा ही  है।  और स्त्री देह की सारी सृजन क्षमता स्तन के साथ साथ  वेजाइना के आस-पास है ।  इसलिए  "वेजाइना गहरी होनी चाहिए"  यह आवश्यक नहीं है,ये सिर्फ एक मिथक है / भ्रम है ।

यही कारण है कि इस संसार में एक स्त्री  जब तक मां नहीं बन जाती, तब तक वह तृप्त नहीं होती।   पुरूष के लिए यह बात सत्य नहीं है ।  कोई नहीं कहेगा कि पुरूष जब तक पिता न बन जाए तृप्त नहीं होगा ।  पिता होना तो मात्र एक संयोग है । कोई भी पुरुष  पिता हो भी सकता है, और  नहीं  भी , यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। एक पुरूष बिना पिता बने रह सकता है , उसे कोई आत्मग्लानि नहीं होगी ,उसका कोई हार्मोनल बैलेंस नहीं बिगड़ेगा  ।  लेकिन बिना मां बने स्त्री  बहुत कुछ खो देती है ।  उसकी पूरी सृजनात्मकता, उसकी पूरी प्रक्रिया तभी जागती है। जब वह मां बन जाती है ।  क्योंकि तब  उसके स्तन उसके अस्तित्व के केंद्र बिंदु बन जाते है । और वह पूर्ण हो जाती है।

      पुरूष स्त्रियों से विवाह करते है ताकि उन्हें पत्नियाँ मिल सके, किंतु  स्त्रियां पुरूषों से विवाह करती है ताकि वे मां बन सकें ।  क्योंकि जो यौन सुख एक स्त्री या पुरुष बिना विवाह के पा सकते है वह तो विवाह के बाद भी एक सा ही रहता है किंतु  एक स्त्री विवाह के बाद माँ बनने का जो सुख पाती है वह उसके   स्त्रीत्‍व को  संपूर्णता प्रदान करता है ।  

10 से 13 वर्ष आयु  की लड़की के जननांग के अण्डाशय में  हर महीने एक विकसित अण्डा  ovary से  उत्पन्न होना  शुरू हो जाता  हैं । यह अण्डा अण्डवाहिका नली  (फैलोपियन ट्यूब) के द्वारा नीचे जाता है , जो कि अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब  यह अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, तब वहां वो कुछ समय पुरुष के शुक्राणु का इंतजार करता है  किंतु किसी भी कारण से  जब उस डिम्ब / अण्डे  का पुरूष के शुक्राणु (sperm) से सम्मिलन नही  हो पाता है  तो वह स्राव  बन जाता है , और  योनि (vagina) के रास्ते बाहर हो जाता है,  इसी बहाव को मासिक धर्म, पीरियड्स ,  रजोधर्म या माहवारी (Menstrual Cycle or MC) कहते हैं ।  यह हर स्त्री के शरीर में होने वाली सामान्य प्रक्रिया है ।


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जो लोग इस लेख में यहां तक पहुंच गए है , वे अवश्य ही अपने मस्तिष्क में अनेक धारणाएं बना चुके होंगे , किंतु मेरे इस लेख का मूल उद्देश्य ही  गुपचुप की जाने वाली बातों को और यौन शिक्षा को सामान्य रूप से उपलब्ध कराना है । आइए अब चौथे और अंतिम बिंदु पर बात करते है -- जो है एक स्त्री का  "नितंब "

"नितंब "  जिसे अंग्रेजी में  "buttocks"  कहा जाता है, शरीर के मध्य भाग में, पीठ के नीचे  दो गोल, मांसल उभार होते हैं।  ये नितंब कूल्हे के ऊपर होते हैं और बैठने के लिए एक गद्दी  की तरह काम करते हैं । नितंब (चूतड )  ग्लूटियल मांसपेशियों और वसा  (चर्बी ) से बने होते हैं  । कई संस्कृतियों में, नितंब को सुंदरता का एक महत्वपूर्ण  अंग माना  जाता है, विशेष रूप से स्त्रियों के संदर्भ  में.   नितंब को व्यायाम करके मजबूत बनाया जा सकता है  और  इसके आकार में सुधार किया जा सकता है। 

सेक्सुअल लैंग्वेज में  नितंब को " बैकअप"  कहा जाता है , जिसका मतलब है कि यदि स्त्री का बैकअप अच्छा और सुडौल है (उभार लिए हुए )  तो स्त्री कामुक होगी , ऐसा कामायन शास्त्र में वर्णित  है ।  किंतु हर स्थिति में ऐसा नहीं होता है , यही भ्रम है , जिस मिथक को समझना है ..........

महिलाओं के पिछवाड़े  / नितंब  बड़े होने के कई कारण हो सकते हैं -- 

✍️वज़न बढ़ना -- शादी के बाद या पहले  अमर्यादित खान पान   की आदत ,  कम शारीरिक गतिविधि , और तनाव बढ़ने की वजह से  शरीर का वज़न बढ़ने के साथ साथ नितंब बड़े हो जाते है । 

✍️ हॉर्मोन में बदलाव -- शादी के बाद या विवाह से पहले  स्त्रियों के शारीरिक  हॉर्मोन में  बदलाव आते  होते रहते हैं. इन बदलावों की वजह से कूल्हों और जांघों में वसा  (चर्बी ) जमा हो जाती है. जिसके कारण नितंब बड़े होने लगने है ।

✍️ गर्भावस्था --  गर्भावस्था के दौरान शरीर के मध्य भाग में  वज़न बढ़ जाने के कारण कूल्हे बड़े हो जाते हैं ।

✍️ जेनेटिक्स -- मां या पिता के शरीर के  आकार और वसा (चर्बी ) के असमान वितरण के कारण अक्सर  स्त्रियों के नितंब जेनेटिक्स  आधार पर बड़े हो जाते है । 

नितंबों के आकार पर  आहार और शारीरिक गतिविधि का गहरा और  बड़ा प्रभाव पड़ता है , शरीर के आकार और वसा वितरण को नियंत्रित करके ,  संतुलित आहार और नियमित व्यायाम करके इन्हें सुधारा जा सकता है । 

 जब आपके रक्त में ग्लूकोज बढ़ा  होता है।  तब महिलाओं की खराब जीवनशैली एवं आदतों के कारण यह बढ़ी रक्त शर्करा  कूल्हों के ऊपर चर्बी (fat)  के रूप में जमने लगती है  जिससे कूल्हे  / नितंब  बड़े और भारी दिखायी देने लगते हैं।  उच्च कैलोरी  वाले खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से भी  महिलाओं के हिप्स फूलने लगते हैं।  रोचक बात यह है कि शर्करा और कैलोरी का  अधिकांश भाग पैरों और कूल्हों में  ही जमा होता है ।

एक  रिसर्च के अनुसार एक पुरुष महिलाओं को पसंद करने के लिए सबसे अधिक उनके चेहरे पर  निर्भर रहता है  , वही दूसरे नंबर पर  स्त्रियों  को उनके नितंब  के उभार और बढ़े हुए आकार को देखकर  उन्हें पसंद करने वाले पुरुषों की संख्या सबसे अधिक रहीं  । इस रिसर्च में  केवल 9% पुरुषों ने स्त्री के स्तन को  महत्व दिया  , इससे यह सिद्ध होता है कि  स्त्रियों का यह अंग भले ही वसा और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ने के कारण बढ़ा हो किंतु  पुरुषों को लुभाने में इसका बहुत अहम योगदान रहता  है ।  

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प्रस्तुति और संकलन -  ज्ञान प्रकाश मिश्र "बाबुल " , आयुर्वेद स्कॉलर 

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