कैसी लिखी गई हनुमान चालीसा ✍️ How was Hanuman Chalisa written?
हनुमान चालीसा की रचना कैसे हुई भगवान को अगर किसी युग में आसानी से प्राप्त किया जा सकता है तो वह युग है कलियुग। इस कथन को सत्य करता एक दोहा श्री रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने लिखा है कलियुग केवल नाम अधारा । सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा।। भावार्थ यह है की कलयुग में मोक्ष प्राप्त करने का एक ही साधन है, और वो है भगवान का नाम जप । तुलसीदास जी ने अपने पूरे जीवन काल में कोई भी ऐसी बात नहीं लिखी जो तर्कसंगत न हो। ऐसा माना जाता है कि कलयुग में हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न हो जाने वाले भगवान हैं। तुलसीदास जी ने हनुमान जी की स्तुति में कई रचनाएँ करी है , जिनमें हनुमान बाहुक, हनुमानाष्टक और हनुमान चालीसा प्रमुख हैं। हनुमान चालीसा की रचना के पीछे एक बहुत जी रोचक घटना है जिसकी जानकारी शायद ही किसी को हो। आइये जानते हैं हनुमान चालीसा की रचना की कहानी ये बात उस समय की है , जब भारत पर मुग़ल सम्राट अकबर का शासन था। एक दिन सुबह के समय एक महिला ने पूजा से लौटते हुए तुलसीदास जी के पैर छुए , तुलसीदास जी ने प्रत्युत्तर में उसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दे द...